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अजमेर शहर का नाम अजयमेरू के नाम पर पड़ा हैं। जिसकी स्थापना राजा अजयपाल चौहान ने की थी अजमेर से 10 किलोमीटर दूर स्थित अजयपाल का मंदिर आज भी अजमेर के संस्थापक की याद दिलाता हैं 12 वीं शताब्दी में गुर्जर राजा अजयराज चौहान के समय यह एक महत्त्वपूर्ण नगर बन गया था उसी ने अजमेर में तारागढ़ का एक मजबूत किला बनवाया था
राजा अजय पाल ने 1113 ईस्वी में इस नगर की स्थापना की थी स्वतंत्रता के पश्चात 1 नवंबर 1956 को अजमेर को राजस्थान में मिला दिया गया और इसी के साथ राजस्थान का एकीकरण पूरा हुआ था
भौगोलिक स्थिति
अजमेर जिले के पूर्व में जयपुर एवं टोंक (Jaipur Tonk road) जिले पश्चिम में पाली उत्तर में नागौर एवं दक्षिण में भीलवाड़ा जिले (Bhilwara district)की सीमाएं हैं नगर के पश्चिम में लगभग 5 किलोमीटर की दूरी है भारत के पश्चिम में स्थित राजस्थान के मध्य में 25°38 से 26°50 उत्तरी अक्षांश तथा 73°54 से 75°22 देशांतर के बीच स्थित है इसका क्षेत्रफल 8481 वर्ग किलोमीटर है
अजमेर नगर जिस पठारी भाग पर स्थित हैं व भारत का सर्वोच्च मैदान हिस्सा है यह संसार की प्राचीनतम मोड़दार अरावली पर्वत (Aravali hills) श्रेणी के बीच स्थित तारागढ़ पर्वत की तलहटी में बसा हुआ है अजमेर जिले के रामसर में बकरी विकास एवं चारा उत्पादन अनुसंधान केंद्र स्थित है मुर्गी पालन प्रशिक्षण केंद्र (Poultry Training Center) अजमेर में ही स्थित है गिरि वन के पशु अजमेर में अजमेरा के नाम से विख्यात है
महत्वपूर्ण स्थल
अढाई दिन का झोपड़ा (Dhai din ka jhopra)
दरगाह के निकट ही अढ़ाई दिन का झोपड़ा है जिसे मोहम्मद गौरी के निर्देशन में कुतुबुद्दीन ऐबक ने इसे तुडवा कर इसी के स्थान पर ढाई दिन का झोपड़ा बनवाया परिवर्तन के समय सात मेहरा बनाएं गए तीन केंद्रीय मेहराबों पर 3 पंक्तियों में लिखावट है पत्थरों पर खुदी हुई अरबी नागरी या सूफी लिपि में है एक मुसलमान फकीर पंजाब शाह का उर्स यहा लगने से अड़ाई दिन का झोपड़ा कहलाने लगा
अजयमेरु दुर्ग तारागढ़ ( गढबीठली दुर्ग)
राजा अजयराज चौहान द्वारा 2855 फीट ऊंची पहाड़ी पर निर्मित इस ऐतिहासिक दुर्ग मे ना जाने कितनी लड़ाइयां एवं शासकों का उत्थान पतन का काल देखा है यह किला पहले अजयमेरु दुर्ग के नाम से विख्यात था इसका विस्तार 2 मील के घेरे में हे एवम छोटे बड़े दो दरवाजें हैं सत्रहवीं शताब्दी में शाहजहां की एक सेनापति गौड़ राजपूत विट्ठल दास द्वारा इस किले की मरम्मत कराई गई थी किले के अंदर पानी के पांच कुंड एवं बाहर की ओर एक जालरा बना हुआ है घर में सबसे ऊंचे स्थान पर निर्मित मीर साहब की दरगाह दर्शनीय है यह दरगाह तारागढ़ के प्रथम गवर्नर मीर सैयद हुसैन खिंगसवार की है
दरगाह
दरगाह ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती ( Khwaja Moinuddin Chishti) की दरगाह, ख्वाजा साहब और गरीब नवाज के नाम से विश्व विख्यात है ख्वाजा भारत में चिश्ती सिलसिला के संस्थापक थे
यह दरगाह एक धार्मिक स्थल है जहाँ मुस्लिमों के साथ साथ अन्य सभी धर्मों के लोग अपनी हाजिरी देने आते हैं
दरगाह अजमेर शरीफ ( Ajmer Sharif) का भारत में बड़ा महत्व है खास बात यह भी है कि ख्वाजा पर हर धर्म के लोगों का विश्वास है। यहाँ आने वाले जायरीन चाहे वे किसी भी मजहब के क्यों न हों, ख्वाजा के दर पर दस्तक देने के बाद उनके जहन में सिर्फ अकीदा ही बाकी रहता है
कहते हैं कि
इरादे रोज बनते हैं, मगर फिर टूट जाते हैं,
वही अजमेर जाते हैं, जिन्हें ख्वाजा बुलाते हैं
चश्मा ए नूर
तारागढ़ के पश्चिम की तरफ घाटी के एक रमणीक स्थल का नाम चश्मा ए नूर है बादशाह जहांगीर ने अपने नाम नुरूद्दीन जहांगीर पर इसका नामकरण चश्मा ए नूर रखा
इस चश्मे का पानी अत्यंत मीठाहै
खोबरानाथ मंदिर
आना सागर के दक्षिणी छोर पर स्थित अत्यंत प्राचीन खोबरा नाथ मंदिर और शादी देव मंदिर के नाम से विख्यात है
अंतेड की माता
आना सागर के उत्तर में दो छोटी पहाड़ियों के बीच अंतर माता का मंदिर स्थित है
कोटेश्वर महादेव
साबरमती नदी (Sabarmati River) के पश्चिम किनारे पर स्थित कोटेश्वर मंदिर पृथ्वी से लगभग 50 फीट ऊंची पहाड़ी पर बना हुआ है जहां प्रतिवर्ष सावन सुदी तेरस को मेला लगता है
मेयो कॉलेज
1875 ई में लॉर्ड मेयो की स्मृति में इस संस्था की स्थापना की गई
झरणेश्वर महादेव
तारागढ़ पहाड़ी के नीचे इंदरगढ़ नामक प्राचीन दुर्ग में स्थित शिव मंदिर झरनेश्वर महादेव कहलाता है
चामुंडा माता
पहाड़ियों के बीच में चामुंडा माता का मंदिर स्थित है
सैनिक विश्राम गृह
अजमेर का सैनिक विश्राम गृह राजस्थान का सबसे पुराना एवं सबसे बड़ा विश्रामगृह है
सालार गाजी
आनासागर से पुष्कर की तरफ जाने वाली सड़क के पास एक छोटी सी पहाड़ी पर सालार गाजी का चिल्ला बना हुआ है
बीसलसर
बीसलसर नामक कृत्रिम झील का निर्माण 1152 ई से 1163 ई के बीच अजमेर के प्रतापी शासक द्वारा करवाया गया
रानीजी का कुंड सरवाड़
सरवाड़ तहसील कार्यालय के पास यह कुंड 500 वर्ष पुराना है
टो्डगढ रावली अभ्यारण
अजमेर, पाली तथा राजसमंद में स्थित यह अभ्यारण टो्डगढ क्षेत्र की अरावली पर्वत श्रृंखला में स्थित है अभ्यारण की स्थापना1983 ई में की गई
सलेमाबाद (किशनगढ़ )
निम्बार्क सम्प्रदाय का प्रमुख केंद्र, प्राचीन वैष्णव मंदिर के लिए प्रसिद्ध है
नसीराबाद
इस छावनी के बंगाल नेटिव इन्फेंट्री के सैनिकों ने 28मई 1857 को विद्रोह किया
तबीजी
देश के पहले राष्ट्रीय बीज मसाला अनुसंधान केंद्र ( Research centre) की स्थापना की गई है विदेशी किस्म के बीज से खेती की जाती है
मान महल
आमेर के राजा मानसिंह के द्वारा निर्मित जो वर्तमान में होटल सरोवर के रूप में जाना जाता है
हाथी भाटा
जहाँगीर के द्वारा बनवाई गई पर्शियन पद्धति की एक हाथी की मूर्ति
घोडे की मजार
तारागढ स्थित मीरा साहब की दरगाह भारत की एकमात्र मजार
नरबड खेड़ा ब्यावर
वूलन इकाईयों को बढ़ावा देने हेतु रीको द्वारा वूलन कॉम्पलेक्स की स्थापना की गई है ब्यावर तिलपट्टी उधोग और को्टन मील के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है
जेठाना
एशियाई विकास बैंक (Asian development bank) के वित्तीय सहयोग से इस स्थापना की गई है इस स्थान पर 600 मेगावाट का पावर ग्रिड स्टेशन की स्थापना की गई
बजरंग गढ़
सागर के निकट पहाडी पर स्थित हनुमानजी का एक मंदिर काफी पुराना है यह मंदिर हिन्दुओं का पवित्र श्रद्धा स्थल बना हुआ है
नसियांजी
स्वर्गीय श्री मूलचंद सोनी द्वारा इसका निर्माण प्रारंभ किया गया एवं उनके ही पुत्र स्वर्गीय सेठ टीकम चंद सोनी द्वारा 1865 में निर्माण कार्य पूरा करवाया गया यह जैन मंदिर प्रथम जैन तीर्थंकर आदिनाथ अथवा ऋषभदेव का है लाल रंग के कारण यह लाल मंदिर के नाम से भी जाना जाता है
राजपूताना संग्रहालय
अजमेर नगर के मध्य स्थित विशाल किला है इसे मैगजीन के नाम से जाना जाता है तत्कालीन राजपूताना और गुजरात क्षेत्र में युद्ध के संचालन के लिए सम्राट अकबर के शासनकाल में 1570 ईसवी में इस किले का निर्माण कराया गया था इसमें चार बड़े हैं इनको जोड़ने वाली दीवारों में कैमरे हैं इसका सबसे सुंदर भाग 84 फीट ऊंचा तथा 43 फीट चौड़ा दरवाजा है
इसे दौलत खाना भी कहते हैं
दादाबाडी
दादाबाड़ी श्वेतांबर संप्रदाय कीर्तन संत जन वल्लभ सूरी के शिष्य श्री जिनदत्त सूरी की स्मृति में निर्मित दादाबाड़ी अजमेर रेलवे स्टेशन से 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है जिनदत्त दादा के नाम से जाने जाते थे इसलिए उनके समाधि स्थल को दादा बाड़ी के नाम से संबोधित किया गया सूर्य की स्मृति में आशा शुक्ला 10 और 11 को यहां वार्षिक मेला भरता है
नारेली
नारेली जैन मंदिर अजमेर में हैं, यह मंदिर श्री ज्ञानदोय तीर्थ के रूप में भी जाना जाता हैं यह अजमेर की सरहद पर जयपुर के राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highway) पर स्थित है। इस आधुनिक भवन पारंपरिक और समकालीन स्थापत्य शैलियों का एक सही मिश्रण होने के लिए मनाया जाता है। यह अपने आसपास के क्षेत्र में 24 लघु मंदिरों के जिनालय रूप में जाना जाता है
मसुदा
राजस्थान का प्रथम पूर्ण साक्षर गांव है
तिलोनिया
अजमेर जिले का यह गांव पैचवर्क के लिए चचिर्त है यहाँ समाज कार्य अनुसंधान केंद्र बीएड कॉलेज में बाल संसद स्थित है राजस्थान सरकार द्वारा गणतंत्र दिवस समारोह का आयोजन किया गया
राजस्थान की सबसे पुरानी डेयरी पदमा डेयरीइसी जिले में स्थित है
हाकीको बढ़ावा देने वाला राजस्थान का पहला एस्ट्रोटर्फ मैदान यही स्थापित है
राजस्थान में पहली आयुर्वेदिक औषधि प्रयोगशाला (Ayurvedic hospital) यही स्थापित है
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