राजस्थान के लोकदेवता महत्वपूर्ण प्रश्न Part-2
हड़बुजी:-
जन्म नागौर के भूड़ेल गांव में हुआ। पिता का नाम मेहाजी सांखला। इनका कार्यस्थल बैगंटी रहा। इनकी गाड़ी की पूजा की जाती हैं। क्योंकि यह बैलगाड़ी से लावारिस पशुओं के लिए चारा लाते थे। हड़बुजी रामदेवजी के मौसेरे भाई थे। इन्होने रामदेवजी के समाज- सुधार के कार्यों को पूरा करने का प्रयास किया था।
देवनारायण जी:-
जन्म स्थान भीलवाड़ा के आंसिद गांव में सम्वत् 1300 में हुआ। पिताजी संवाई भोज एवं माता सेडू खटाणी।
यह गुर्जर बगड़ावत वंष के थे। बचपन का नाम उदयसिंह। पत्नी पीपलदे , जो मध्यप्रदेष के धार के शासक
जयसिंह की पुत्री थी। विष्णु का अवतार माना जाता हैं। इनकी फड़ सबसे लम्बी हैं जो 35 ग 5 हैं। इनकी फड़ पर भारत सरकार के द्वारा 5 रु का टिकट भी जारी किया जा चुका हैें। भाद्र शुक्ल छठ और सप्तमी को मेला भरता हैं।
इनका प्रमुख मंदिर आंसिद ( भीलवाड़ा ), देवधाम जोधपुरिया ( टोंक ), देवडूंगरी ( चित्तौड़गढ़ ) और देवमाली
( ब्यावर ) में हैं।
मेहाजी :-
मारवाड़ के लोकदेवता। मांगलिया ( राजपूत ) जातिके अराध्य देव हैं। इन्हे पंचपीरों में गिना जाता हैं , घोड़ा किरड़ काबरा हैं। इनका मेला जोधपुर के बापणी गांव में कृष्ण जन्माष्टमी को भरता हैं। जैसलमेर के रांणगदेव से युद्ध करते हुए शहीद हुए।
भूरिया बाबा:-
यह गोमतेष्वर के नाम से जाने जाते हैें। यह मारवाड़ ( गोड़वाड़ ) के मीणा जाति के आराध्य देव हैं। दक्षिण राजस्थान के मीणा कभी भी इनकी झूठी कसम नहीं खाते हैं।
मल्लीनाथजी :-
जन्म 1358 ई. सन् में हुआ। पिता का नाम तीड़ाजी एवं माता का नाम जाणीदेव। इन्होने निजामुद्दीन की सेना
को परास्त किया था। इनका मेला चैत्र कृष्ण एकादषी से पन्द्रह दिन तक लूणी नदी के किनारे तिलवाड़ा
( बाड़मेर ) नामक स्थान पर पशु मेला भरता हैं। यह मेला मल्लीनाथजी के राज्याभिषेक के अवसर से वर्तमान तक आयोजित हो रहा हैं।
बाड़मेर का गुड़ामलानी का नामकरण मल्लीनाथजी के नाम पर ही हुआ हैं।
कल्लाजी :-
इनका जन्म मेड़ता ( सामियाना ) में हुआ था। मीराबाई इनकी बुआ थी। चित्तौड़ के तीसरे शाके (1567 ) में मुगल अकबर की सेना से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। यह चार हाथ वाले लोकदेवता हैें। इनकी पूजा भूत- पिषाच से ग्रस्त व्यक्ति, पागल कुत्ते, विषैले नाग के काटने पर की जाती हैं। इनकी मुख्य पीठ जालौर के रनैला गांव में हैं। इन्हे शेषनाग का अवतार माना जाता हैं।
बिग्गाजी :-
जाखड़ समाज के इष्टदेव। जन्म बीकानेर के रीढ़ी गांव में हुआ। इन्होने मुस्लिम लुटेरों से गायों
की रक्षा की। डूंगरपुर के बिग्गा गांव में इनका मुख्य थान हैं।
झुंझारजी :-
इनका जन्म सीकर में हुआ था। खेजड़ी के पेड़ के नीचे इनका निवास स्थान माना जाता हैं।
देवबाबा :-
इनका जन्म भरतपुर के नांगल गांव मंे हुआ था। यह गुर्जर व ग्वालों के अराध्य देव हैं। इन्हे पशु चिकित्सा का अच्छा ज्ञान था। इनका मेला भाद्रपद शुक्ल ( सुदी ) पंचमी एवं चैत्र सुदी पंचमी को भरता हैं।
मामादेव :-
मेवाड़ में बरसात के देवता के रूप में पूजे जाते हैं। इनकी मूर्ति लकड़ी की होती हैं , जो मुख्य द्वार पर तोरण के रूप में एवं गांव के बाहर सड़क के किनारे रखी जाती हैं।
तल्लीनाथजी:-
यह राठौड़ वंषीय थे। इनका मुख्य मन्दिर पांचोटा पहाड़ी ( जालौर ) में पड़ता हैं। इनके बचपन का नाम ‘‘ गांग देव’’ था। इनके गुरू जलन्धर ने इनका नाम तल्लीनाथ रखा था।
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